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आपका यक़ीन ही आपका यथार्थ है ।

ज़िन्दगी किसी के रोके नहीं रूकती है बस चलती जाती है बहती जाती है नदी के धारा के समान। कभी रुलाती है कभी हँसाती है और सब से बड़ी बात रोज़ रोज़ कुछ ना कुछ सिखाती है। ये अलग बात है सिखने के लिये हमने अपना दिमाग़ कितना खुला रखा है ? बहुत सारे लोग… Continue reading आपका यक़ीन ही आपका यथार्थ है ।

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भारत की क़ानून व्यवस्था

कितना घोर अन्याय है एक लड़की के साथ ज़ुल्म हो जाता है, पुलिस FIR नहीं लेती । उलटे उसके पिता को केस ना करने के लिए मारपीटा जाता है और अत्याचार की ऐंतहा तब हो जाती है जब उसकी मौत हो जाती है तब कहीं जाकर प्रशासन की नींद खुलती है तब SIT का गठन… Continue reading भारत की क़ानून व्यवस्था

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वही करो जो मन को शकुन दे

किसी को ख़ुश करने के लिये काम मत करो किसी को दुखी करने के लिए काम मत करो काम बस वही करो जो सत्य और सुंदर हो और आपके दिल को सुकून दे । बस अपनी मौज में काम करो, अपनी मौज में जियो। ज़िंदगी के किताब से

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दूसरों को सुधारने की चाहत

इंसान अपनी निजी ज़िन्दगी में हमेशा इक अच्छे और ईमानदार मित्र की चाहत रखता है और जाने अनजाने में इसकी तलाश भी करता रहता। इसलिये इसे मैं इंसान की सहज चाहत और व्यवहार मानता हूँ। पर इसके साथ एक सर्वमान्य व्यवहार यह भी देखा जाता है की हम प्रायः इस बात के लिये जनमत नहीं… Continue reading दूसरों को सुधारने की चाहत

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हम अपने नियति के निर्माता है

मेरी अपनी मान्यता है कि इंसान अपने सोच और यक़ीन के अनुसार ही साधारण और असाधारण बनता है । जैसे ही बच्चा इस धरती पर आता है वह नई नई चीज़ें देखता है और उसके साथ छोटी बड़ी घटनाएँ होती रहती है। ये घटनाएँ अच्छी भी होती है और बुरी भी होती है । ये… Continue reading हम अपने नियति के निर्माता है

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पुरूषों की मानसिकता

सैकड़ों सालों से पुरुषों के द्वारा पत्नी को नाना प्रकार से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा है।सती प्रथा, बाल बिवाह, बहुविवाह, तलाक़ और जाने किस किस तरह से। इनमे से कईयों पर क़ानूनी रूप से रोक लगाया जा चुका है और कई अलग अलग रूपों में बदस्तूर जारी है। इसके तह… Continue reading पुरूषों की मानसिकता

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प्रकृति सबों को समान स्वतंत्रता देती है

प्रकृति सबो को समान रूप से अपनी ज़िंदगी में चुनाव करने की स्वतंत्रता देती है, इस बावत किसी भी प्रकार की कोई पक्षपात नहीं होती है। पर हाँ, सही क्या है ग़लत क्या है इसकी समझ प्रकृति से नहीं मिलती है, इसकी समझ हमें रोज़ रोज़ सीखनी पड़ती है और उसे अपनी ज़िन्दगी में उतारनी… Continue reading प्रकृति सबों को समान स्वतंत्रता देती है