प्रकृति सबों को समान स्वतंत्रता देती है

प्रकृति सबो को समान रूप से अपनी ज़िंदगी में चुनाव करने की स्वतंत्रता देती है, इस बावत किसी भी प्रकार की कोई पक्षपात नहीं होती है। पर हाँ, सही क्या है ग़लत क्या है इसकी समझ प्रकृति से नहीं मिलती है, इसकी समझ हमें रोज़ रोज़ सीखनी पड़ती है और उसे अपनी ज़िन्दगी में उतारनी पड़ती है। यही से लोगों की ज़िन्दगी में बड़ा फ़र्क़ पड़ना शुरू हो जाता है। सही मायने में हमारी ज़िन्दगी के लिए सही क्या है ग़लत क्या है इसकी सही समझ और बुद्धिमत्ता बहुत कम लोग विकसित कर पाते है और इसी वजह से बहुत कम लोग अपनी ज़िंदगी में असमान्य सफलताएँ और ऊँचाई हासिल कर पाते है । बाक़ी लोग अपनी चुनाव करने की छमता का ग़लत इस्तेमाल करके औसत और औसत से नीचे की सफलताएँ हासिल करते है और औसत और औसत से नीचे की ज़िंदगी जीते है, और उन लोगों में से अधिकांश अपने भाग्य, हालात और जाने किन किन चीज़ों को कोशते हुए अपनी ज़िंदगी गुज़ार देते है