चुनौतीपूर्ण काम करें

चुनौतीपूर्ण काम करें

यह हम सबों की आम मानसिकता होती है कि जीवन को और आराम दायक बनाया जाय, ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें। इसी बात में ही जीवन के अधिकांश दुःख और समस्या भी छिपा हुआ है । चुनौती से भाग कर जितना ज़्यादा आराम की तरफ़ हम बढ़ते हैं हम अपने आपको कमज़ोर बनाते जाते है। जब हम अन्दर से आराम तलब और कमज़ोर हो जाते हैं तब जीवन में छोटी छोटी बातें हमें बहुत बड़ी और दुखदायी लगने लगती है।
कभी आपने ध्यान दिया है सभी लोग लगातार बारिश से बेहाल है, कौवा और दूसरे पंछी उसी बारिश में अपने भोजन की तलाश में इधर उधर नज़र दौरता रहता है उड़ रहा है। उसे ध्यान से देखने पर पायेंगेकी उसे इस लगातार बारिश से कोई गिला कोई शिकवा नहीं है बस अपने रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त है। हम इंसान ही अपना ज़्यादा समय बस गिले शिकवे में ही बिता देते हैं और ख़ास कर उन चीज़ों पर जिन पर हमारा कोई बस नहींहोता है।
अतः मेरा मानना है कि रोज़ थोड़ा कठिन काम कीजिए। अपनी क्षमता से बस थोड़ा ही ज़्यादा।बहुत पहाड़ तोड़ने की अवस्यकता नहीं है बस अपनी क्षमता को थोड़ा थोड़ा बढ़ाइए तब आपको आपको जीवन में कठिनाइयाँ एक अवसर दिखने लगेंगी। जीवन में अपना नज़रिया थोड़ा बदलिए नज़ारे बदलने लगेंगे।
नवरात्रा पर सभी मित्रों को ढेर सारी बधाइयाँ और शुभ कामनाएँ।