ABOUT US

मित्रों,
मैं एक बैंकर हूँ और अपनी सेवाएँ SBI में देता हूँ। बैंकिंग के बाद मैं रोज़ उन बातों को संजोता हूँ जो मुझे अपने ज़िंदगी को ज़्यादा बेहतर ढंग से समझने और जीने में मदद करता है। अपनी लम्बी बैंकिंग जीवन में बहुत तरह के लोगों से रोज़ मिलने का अवसर मिलता है जिनसे ज़िंदगी के बहुत सारी नई बातों को सिखता हूँ और समझता हूँ जिसे मुझे ज़िन्दगी के प्रति एक नयी समझ और दृष्टि मिलती है। इसी समझ और दृष्टि को मैं अपने ब्लॉग के द्वारा आप सबों तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।

मैंने अपनी ज़िंदगी में पाया है कि इंसान अपने सोच और यक़ीन के अनुसार ही साधारण और असाधारण बनता है।यह साधारण और असाधारण बनने की प्रक्रिया बच्चे के जनम लेने के साथ ही सुरु हो जाती है ।जैसे ही बच्चा इस धरती पर आता है वह नई नई चीज़ें देखता है और उसके साथ छोटी बड़ी घटनाएँ होती रहती है। ये घटनाएँ अच्छी भी होती है और बुरी भी होती है।ये सभी घटनाएँ उसके बाल मन के  ऊपर एक छाप छोड़ती  जाती है। यही छाप उस बच्चें के मन में  धारणाओं का निर्माण करता है। यही धारणाएँ उसके जीवन में एक एक करके अच्छी  या बुरी चीज़ों को आकर्षित करती रहती है और इसी धारणा और मान्यताएँ के अनुरूप घटनाएँ घटती चली जाती   है। इन्ही अच्छी या बुरी घटनाओं को  आम तौर पर हम सब नियति या भाग्य कहते हैं।

हमारा यक़ीन ही हमारा यथार्थ बन जाता है।
अपने यक़ीन को बदल कर हम अपने यथार्थ को बदल सकते है।
छोटी छोटी सफलताएँ हमारे यक़ीन को मज़बूत करती जाती है।

नरेश साहनी