निम्न कोटि के लोगों की वृद्धि दर

माल्थस ने कहा था “इन्सान अपनी जनन शक्ति से हमेशा परेशान रहेगा”, और उनकी यह बात हमेशा सच दिख रही है। पूरी दुनिया से जो आँकड़े आते हैं उस से यह बात स्पष्ट हो जाता है कि बुद्धिमान और विकसित लोग आबादी बढ़ाने में बिलकुल ही इक्षुक नहीं है ऐसे लोगों का पारिवारिक ढाँचा एकदम सीमित होता है पर निचले स्तर पर के लोगों का इस पर ना ही कोई नियंत्रण होता है और ना ही उनके पास सोच और साधन होते हैं जिस से कि परिवार को नियंत्रित रखा जाय। दूसरी बात कि उच्च कोटि के लोग उच्च कोटि के बच्चे पैदा करते है और निम्न कोटि के लोग निम्न कोटि के बच्चे पैदा करते है।यह एक औसत अकड़ा है पर अपवाद सभी जगह पाया जाता है। अब ज़रा ध्यान दीजिए कि इसका असर समाज पर किस प्रकार से पड़ता है? उच्च कोटि के लोग चूँकि काम बच्चे पैदा करते हैं अतः समाज में उच्च कोटि के नागरिक कम जुड़ते हैं। दूसरी तरफ़ निम्न कोटि के लोग अधिक बच्चे पैदा करते है अतः समाज में निम्न कोटि के बच्चे तेज़ी से अधिक संख्या में जुड़ते जाते हैं। आगे चलकर होता यह है कि समाज में निम्न कोटि के लोगों की संख्या बहुत बढ़ जाती है है और उच्च कोटि के लोगों की संख्या बहुत कम रह जाती है। ये निम्न कोटि के लोग बेहद आक्रामक और उदंड होते हैं जो किसी अनुशासन को नहीं मानते, सारी क़ायदे क़ानून को धता बताते हैं और समाज में एक अराजक स्थिति पैदा करते हैं। इस प्रकार के निम्न कोटि के लोग दूसरों के मान मर्यादा से कोई लेना देना नहीं होता है उलटे उनका अहंकार सातवें आसमान पे होता है।इसका नतीजा यह होता है कि ये उच्च कोटि के लोग डरे सहमे जीते हैं।

आज के रोज़मर्रा के हालात को देखने पर यह सब बातें अक्षरश रोज़ घटित होता हुआ दिख रहा है। और इस से भी बुरी बात जो भविष्य में होंगी वो यह कि उच्च कोटि के लोग इतने त्रस्त हो जायेंगे कि उन्हें अपनी पुरानी जगह छोड़कर भागने की भी नौबत आएगी। बहुतों को मेरी बात अतिशयोक्ति लग सकती है पर यह भी एक सच्चाई है जो गाहे बेगाहे अपने ही देश में देखने को मिलती ही रहती है । सच्चाई से आँखे चुराने वाला शतुर्मुर्ग बेशक बालू में अपनी मुंडी को छिपाकर आसन्न ख़तरों से अपने को बचा नहीं पता है बल्कि शिकारी का काम को और भी आसान कर देता है।

स्वर्गीय संजय गांधी ने जनसख्या नियंत्रण के लिए बेशक कड़े क़दम उठाये थे जो कि असफल ही गया था, मेरा मानना है कि उसे लागू करने के तरीक़े में ख़ामी थी। पर, इस बात में कोई शक की गुंजाइस नहीं है कि उनका सोच बहुत ही क्रांतिकारी और दूरदर्शी भरा था जो जनसंख्या के मामले में पूरी दुनिया में सम्मानजनक स्थिति में होता। अभी तो हमारा देश भी बच्चा पैदा करने में बांग्ला देश से बहुत ज़्यादा पीछे नहीं है ।

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