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हम अपने नियति के निर्माता है

a6bcf109-87a3-4d58-a996-fe5715960c26-e1516806961573.jpegमेरी अपनी मान्यता है कि इंसान अपने सोच और यक़ीन के अनुसार ही साधारण और असाधारण बनता है । जैसे ही बच्चा इस धरती पर आता है वह नई नई चीज़ें देखता है और उसके साथ छोटी बड़ी घटनाएँ होती रहती है। ये घटनाएँ अच्छी भी होती है और बुरी भी होती है । ये सभी घटनाएँ उसके बाल मन के ऊपर एक छाप छोरती जाती है । यही छाप उस बच्चें के मन में धारणाओं का निर्माण करता है । यही धारणाएँ उसके जीवन में एक एक करके अच्छि या बुरी चीज़ों को आकर्षित करती रहती है और घटित करती रहती है ।जिसे आम तौर पर लोग नियति या भाग्य कहते हैं।

इस ब्लोगिंग साइट पर मैं उस बातों और घटनाओं का ज़िक्र करता हूँ कि कैसे अमुक घटना ने उसके सोचने और ज़िंदगी को देखने का नज़रिया बदल दीया और उसके वजह से उसके ज़िंदगी में कैसे बदलाव आ गया । इस ब्लॉग के माध्यम से मैं लोगों के बीच इस बात की चर्चा करना चाहता हूँ की हमारा भाग्य कोई ऊपर बैठा भगवान नहीं लिखता है बल्कि हम अपने आदतन सोच और व्यवहार के द्वारा हम अपने भाग्य का निर्माण करते है । हम ही अपने नियति के निर्माता है ।

2 विचार “हम अपने नियति के निर्माता है&rdquo पर;

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