Motivation and Inspiration

अभिभावक और बच्चों का परवरिश

बच्चे अपने अभिभावक के मान सम्मान को ताक में रख कर घर से भाग कर शादियाँ करे इस बात का मैं किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं करता। पर, इस बात से इंकार तो नहीं किया जा सकता कि बच्चे को सही और ग़लत की समझ को सही तरीक़े से बच्चे में विकसित करने में… Continue reading अभिभावक और बच्चों का परवरिश

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औरतों के प्रति क़बिलाई सोच

हमारा आज का आधुनिक समाज सैकड़ों साल पहले क़बिलाई समाज हुआ करता था। इन कबिलाओं में अक्सर लड़ाइयाँ हुआ करती थी और जितने वाले हारने वाले कबिलाओं के सम्पत्तियों, मवेशियों और औरतों को छीन कर अपने कबीला में ले जाते थे। इसके वजह से उस ज़माने में जब किसी परिवार में लड़की पैदा होती थी… Continue reading औरतों के प्रति क़बिलाई सोच

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लाटरी ख़रीदने की मानसिकता

एक युवक नियमित रूप से लाटरी की टिकट ख़रीदता है, इस आशा में कि एक ना एक दिन उसका भाग्य पलटी खायगा और उसे एक बड़ी लाटरी लगेगी और उसके सारे अभाव दूर हो जायेंगे उसकी ज़िन्दगी ख़ुशियों से भर जाएगी। मैंने देखा है कि ऐसे लोगों की पूरी ज़िन्दगी इसी आस में और अभाव… Continue reading लाटरी ख़रीदने की मानसिकता

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आपका यक़ीन ही आपका यथार्थ है ।

ज़िन्दगी किसी के रोके नहीं रूकती है बस चलती जाती है बहती जाती है नदी के धारा के समान। कभी रुलाती है कभी हँसाती है और सब से बड़ी बात रोज़ रोज़ कुछ ना कुछ सिखाती है। ये अलग बात है सिखने के लिये हमने अपना दिमाग़ कितना खुला रखा है ? बहुत सारे लोग… Continue reading आपका यक़ीन ही आपका यथार्थ है ।

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भारत की क़ानून व्यवस्था

कितना घोर अन्याय है एक लड़की के साथ ज़ुल्म हो जाता है, पुलिस FIR नहीं लेती । उलटे उसके पिता को केस ना करने के लिए मारपीटा जाता है और अत्याचार की ऐंतहा तब हो जाती है जब उसकी मौत हो जाती है तब कहीं जाकर प्रशासन की नींद खुलती है तब SIT का गठन… Continue reading भारत की क़ानून व्यवस्था

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वही करो जो मन को शकुन दे

किसी को ख़ुश करने के लिये काम मत करो किसी को दुखी करने के लिए काम मत करो काम बस वही करो जो सत्य और सुंदर हो और आपके दिल को सुकून दे । बस अपनी मौज में काम करो, अपनी मौज में जियो। ज़िंदगी के किताब से

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दूसरों को सुधारने की चाहत

इंसान अपनी निजी ज़िन्दगी में हमेशा इक अच्छे और ईमानदार मित्र की चाहत रखता है और जाने अनजाने में इसकी तलाश भी करता रहता। इसलिये इसे मैं इंसान की सहज चाहत और व्यवहार मानता हूँ। पर इसके साथ एक सर्वमान्य व्यवहार यह भी देखा जाता है की हम प्रायः इस बात के लिये जनमत नहीं… Continue reading दूसरों को सुधारने की चाहत